
ज्यौझांग का ऐतिहासिक मील का पत्थर: फोटोनिक क्वांटम वर्चस्व में चीन की निर्णायक जीत
आज 2026 में, जब हम व्यावहारिक क्वांटम अनुप्रयोगों और फॉल्ट-टोलरेंट प्रणालियों के युग में प्रवेश कर चुके हैं, पीछे मुड़कर देखने पर 2020 का वह दौर क्वांटम कंप्यूटिंग के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ दिखाई देता है। चीन के 'ज्यौझांग' (Jiuzhang) प्रोटोटाइप ने न केवल 'क्वांटम वर्चस्व' (Quantum Supremacy) के दावे को पुख्ता किया, बल्कि फोटोनिक दृष्टिकोण के माध्यम से कंप्यूटिंग की एक नई दिशा भी तय की।
क्वांटम वर्चस्व की दूसरी लहर
दिसंबर 2020 में, हेफ़ेई स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ चाइना (USTC) के शोधकर्ताओं ने, जिसका नेतृत्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी पैन जियानवेई कर रहे थे, दुनिया को चौंका दिया। गूगल के 2019 के 'साइकैमोर' (Sycamore) के दावे के बाद, यह दूसरी बार था जब किसी क्वांटम मशीन ने एक विशिष्ट कार्य को पारंपरिक सुपरकंप्यूटर की तुलना में खरबों गुना तेजी से पूरा किया था।
तकनीकी विशेषता: गॉसियन बोसोन सैंपलिंग (GBS)
ज्यौझांग की सफलता का आधार 'गॉसियन बोसोन सैंपलिंग' नामक एक जटिल गणितीय समस्या थी। जहाँ गूगल ने सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स (Superconducting Qubits) का उपयोग किया था, वहीं ज्यौझांग ने फोटोनिक्स—यानी प्रकाश के कणों—का उपयोग किया।
- गति: उस समय के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर 'फुगाकू' (Fugaku) को जिस गणना को करने में 600 मिलियन वर्ष लगते, ज्यौझांग ने उसे मात्र 200 सेकंड में पूरा कर दिया।
- तापमान: सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स के विपरीत, जो पूर्ण शून्य के करीब तापमान की मांग करते हैं, ज्यौझांग के ऑप्टिकल सेटअप के कुछ हिस्से कमरे के तापमान पर काम करने में सक्षम थे।
- पैमाना: 2020 में इसने 76 फोटोन का पता लगाया था, जो बाद के वर्षों (ज्यौझांग 2.0 और 3.0) में बढ़कर सैकड़ों तक पहुँच गया, जिससे इसकी शक्ति में घातीय वृद्धि हुई।
इतिहास में इसका स्थान और 2026 का प्रभाव
2026 के परिप्रेक्ष्य से, ज्यौझांग केवल एक वैज्ञानिक प्रयोग नहीं था, बल्कि इसने वैश्विक क्वांटम रेस के संतुलन को बदल दिया। इसने साबित किया कि क्वांटम वर्चस्व हासिल करने के कई रास्ते हैं और फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग बड़े पैमाने पर नेटवर्क बनाने के लिए सबसे उपयुक्त हो सकती है।
ज्यौझांग की सफलता ने भारत सहित कई देशों को अपने राष्ट्रीय क्वांटम मिशनों में फोटोनिक्स पर अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आज हम जो क्वांटम एन्क्रिप्शन और सुरक्षित संचार नेटवर्क देख रहे हैं, उसकी नींव में कहीं न कहीं वह मील का पत्थर है जिसे 2020 में स्थापित किया गया था।
निष्कर्ष
क्वांटम कंप्यूटिंग के इतिहास में ज्यौझांग का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इसने हमें सिखाया कि जब हम फोटोन की शक्ति को नियंत्रित करते हैं, तो गणना की सीमाएं समाप्त हो जाती हैं। आज 2026 में, यह उपलब्धि केवल एक प्रयोगशाला की जीत नहीं, बल्कि मानव मेधा और भविष्य की कंप्यूटिंग की दिशा का प्रमाण है।


