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स्केलेबल सिस्टम के लिए सेमीकंडक्टर फाउंड्री में निर्मित फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग चिप।

साईक्वांटम (PsiQuantum): सिलिकॉन वैली का वो दांव जो क्वांटम जगत को बदल सकता है

June 19, 2026By QASM Editorial

वर्ष 2026 तक आते-आते, क्वांटम कंप्यूटिंग अब केवल प्रयोगशालाओं का विषय नहीं रह गई है। जहाँ दुनिया की बड़ी टेक कंपनियाँ सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स (Superconducting Qubits) और ट्रैप्ड आयन्स (Trapped Ions) के बीच उलझी हुई थीं, वहीं सिलिकॉन वैली स्थित स्टार्टअप 'साईक्वांटम' (PsiQuantum) ने एक बिल्कुल अलग और साहसी रास्ता चुना है: फोटोनिक्स।

फोटोनिक्स ही क्यों?

साईक्वांटम का मानना है कि यदि हमें वास्तव में उपयोगी 'फॉल्ट-टोलरेंट' (Fault-tolerant) क्वांटम कंप्यूटर बनाना है, तो हमें लाखों क्यूबिट्स की आवश्यकता होगी। पारंपरिक तरीके, जिनमें अत्यधिक ठंड (Cryogenic temperatures) की आवश्यकता होती है, इतने बड़े पैमाने पर स्केल करना बेहद कठिन हैं। साईक्वांटम ने प्रकाश के कणों यानी फोटॉन्स का उपयोग करके इस समस्या का समाधान खोजा है।

  • स्केलेबिलिटी: फोटोनिक चिप्स को मौजूदा सिलिकॉन फैब्रिकेशन प्लांट में बनाया जा सकता है।
  • कम तापमान की कम आवश्यकता: फोटॉन्स को सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स की तरह शून्य से नीचे के अत्यधिक तापमान पर रखने की ज़रूरत नहीं होती, जिससे बुनियादी ढांचे की लागत कम हो जाती है।
  • कनेक्टिविटी: फाइबर ऑप्टिक्स के माध्यम से विभिन्न क्वांटम चिप्स को जोड़ना आसान है, जो एक विशाल क्वांटम नेटवर्क बनाने के लिए अनिवार्य है।

2026: वादों से हकीकत की ओर

आज 2026 में, साईक्वांटम की रणनीति काफी स्पष्ट दिखाई दे रही है। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में उनके नए डेटा सेंटर के परिचालन में आने के साथ ही, कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि क्वांटम कंप्यूटिंग को औद्योगिक स्तर पर ले जाया जा सकता है। ग्लोबलफाउंड्रीज़ (GlobalFoundries) के साथ उनकी साझेदारी ने उन्हें उस उत्पादन क्षमता तक पहुँचा दिया है, जिसका सपना अन्य स्टार्टअप अभी भी देख रहे हैं।

भारत और वैश्विक परिदृश्य पर प्रभाव

भारत के 'नेशनल क्वांटम मिशन' के विशेषज्ञों के लिए, साईक्वांटम की प्रगति एक महत्वपूर्ण सबक है। यह दर्शाता है कि केवल क्यूबिट की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि उसे बनाने और स्केल करने की तकनीक सबसे महत्वपूर्ण है। यदि साईक्वांटम अपने 10 लाख क्यूबिट के लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, तो दवा निर्माण, सामग्री विज्ञान और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांति आ जाएगी।

निष्कर्ष

साईक्वांटम ने जो दांव लगाया है, वह केवल एक तकनीक पर नहीं, बल्कि भविष्य के कंप्यूटरों के निर्माण की पूरी पद्धति पर है। 2026 के इस दौर में, वे न केवल एक स्टार्टअप हैं, बल्कि एक नए कंप्यूटिंग युग के ध्वजवाहक बनकर उभरे हैं। क्या फोटोनिक्स ही क्वांटम का भविष्य है? फिलहाल तो पेलो अल्टो का यह स्टार्टअप इसी दिशा में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।

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